भोपाल के मास्टर प्लान पर बुद्धिजीवियों का मंथन: अभिनेता राजीव वर्मा का सवाल—"वह ऐतिहासिक तालाब कहां गया, जिस पर बसा था शहर?"

Oct 12, 2026 - 15:06
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भोपाल के मास्टर प्लान पर बुद्धिजीवियों का मंथन: अभिनेता राजीव वर्मा का सवाल—"वह ऐतिहासिक तालाब कहां गया, जिस पर बसा था शहर?"

संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के विस्थापितों के हितों की पुरजोर पैरवी; मास्टर प्लान के प्रारूप को अंतिम नहीं मानकर सुधार की मांग

हिंदुस्तान मेल

भोपाल। राजधानी भोपाल में मास्टर प्लान के प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर शहर के बुद्धिजीवियों, व्यापारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों का एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी सह मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया। 'नगर विकास मंच' के बैनर तले संत हिरदाराम नगर में हुई इस संगोष्ठी के संयोजक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर बिहारीलाल लोकवानी रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में जाने-माने सिने कलाकार एवं T&CP के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके राजीव वर्मा ने शिरकत की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजीव वर्मा ने भोपाल के इतिहास के एक बड़े पन्ने को पलटते हुए सीधा सवाल उठाया, "वह तालाब आखिर कहां गया, जिसके नाम पर भोपाल नगर बसाया गया था?"

उन्होंने विस्तार से ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखते हुए बताया कि होशंगाबाद के तत्कालीन राजा के बेटे की इस तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई थी और जब उसका शव नहीं मिला, तब राजा ने इसके एक हिस्से को सुखा दिया था, जिससे इसका मूल स्वरूप छोटा हो गया। बाद के वर्षों में भी इसके संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। वर्मा ने जोर देकर कहा कि तालाब के चारों तरफ एक शानदार सड़क का निर्माण होना चाहिए, जैसा कि पहले भी प्रस्ताव था। उन्होंने कहा कि यदि वीआईपी रोड न बनता, तो शायद तालाब का एक और हिस्सा अस्तित्वविहीन हो जाता। आज भी तालाब को बचाने और इसके चारों ओर अतिक्रमण रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

"मास्टर प्लान का यह सिर्फ प्रारूप है, अंतिम नहीं"

राजीव वर्मा ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान का यह अभी केवल एक ड्राफ्ट यानी प्रारूप है, कोई अंतिम निर्णय नहीं। प्रारूप जनता के सामने इसलिए लाया जाता है ताकि लोग अपने सुझाव दें और खामियों को दूर किया जा सके। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया कि मास्टर प्लान में कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिशों के संकेत भी मिलते हैं, जिस पर सुधार की आवश्यकता है।

संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) का पुरजोर पक्ष

संगोष्ठी में संत हिरदाराम नगर से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल—कन्हैयालाल इसरानी, सुरेश जसवानी, नरेश चोटरानी और कमल प्रेमचंदानी ने अपने क्षेत्र की अनूठी पृष्ठभूमि रखते हुए मास्टर प्लान में सुधार की मांग की। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र 1948 में पश्चिमी पाकिस्तान से आए सिंधी हिंदू विस्थापितों की कर्मभूमि है, जिसके तीन तरफ पानी और एक तरफ रेल पटरियां व सैन्य इलाका है। इसके बावजूद इसके मुख्य मार्ग को छोड़कर शेष हिस्से को 'ग्रीन लैंड' घोषित करना कतई उचित नहीं है।

सिंधी सेंट्रल पंचायत के महासचिव सुरेश जसवानी ने कहा कि सिंधी समाज ने देश की आजादी के लिए अपना वतन कुर्बान किया, तमाम कष्ट सहे और अपने बलबूते इस क्षेत्र को खड़ा किया। आज बैरागढ़ (संत हिरदाराम नगर) इंदौर के बाद कपड़े और बर्तनों की सबसे बड़ी मंडी है, जहां सालाना लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। उन्होंने कहा कि यहां के नागरिक आयकर, जीएसटी और प्रॉपर्टी टैक्स का भारी-भरकम भुगतान करते हैं। इसलिए मास्टर प्लान में इस क्षेत्र को 'मिक्स लैंड यूज' (मिश्रित भूमि उपयोग) या पूरी तरह से आवासीय घोषित किया जाना चाहिए।

श्री जसवानी ने याद दिलाया कि इन विस्थापितों को केंद्र सरकार के पुनर्वास विभाग ने बसाया था और समय-समय पर जारी शासकीय आदेशों में स्पष्ट है कि आवासीय भूखंडों पर अलग प्रयोजन की अनुमति दी जा सकती है।

आरंभ में संयोजक बिहारीलाल लोकवानी ने संगोष्ठी की रूपरेखा रखी, जबकि जाने-माने कारोबारी आनंद सोनी ने भी संत हिरदाराम नगर को मास्टर प्लान में विशेष दर्जा दिए जाने की पुरजोर वकालत की। इस दौरान मंच पर रुचिका सचदेव, राधिका कृष्ण, नित्या तलरेजा सहित राजधानी के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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