खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: 19 निलंबित राशन दुकानों का अटैचमेंट
सेटिंग' करने वाले अफ़सरों और धांधलीबाज़ संचालकों में हड़कंप!
भोपाल।
राजधानी में राशन कालाबाजारी और कागज़ी हेराफेरी के खेल पर खाद्य विभाग का करारा प्रहार हुआ है। बिना दस्तावेजों और गंभीर धांधलियों के आरोप में नापे गए 19 शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालकों की मनमानी पर ताला जड़ते हुए जिला प्रशासन ने सभी दुकानों का बोरिया-बिस्तर समेट दिया है। जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी (कंट्रोलर) चंद्रभान सिंह जादौन के कड़े रुख के बाद इन सभी 19 निलंबित दुकानों को उसी क्षेत्र की दूसरी चालू दुकानों में अटैच कर दिया गया है।
पीओएस मशीनें भी ज़ब्त, राशन वितरण पर सीधी निगरानी
खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन ने दोटूक लहजे में कहा कि गरीब हितग्राहियों के निवाले पर कोई आंच न आए, इसलिए पीडीएस का राशन वितरण सुचारू रखने हेतु निलंबन के साथ ही अटैचमेंट की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। इसके अलावा निलंबित दुकानों की पीओएस मशीनें भी तुरंत छीनकर संलग्न दुकानों के सुपुर्द कर दी गई हैं।
कार्यालय कलेक्टर (खाद्य शाखा) भोपाल द्वारा जारी आदेश के तहत मध्य प्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 की धारा 16 का इस्तेमाल करते हुए यह सर्जिकल कार्रवाई की गई है।
अटैचमेंट का पूरा ब्योरा (निलंबित दुकान कोड ➔ संलग्न दुकान कोड):
* 2803053 ➔ 2803055 (गिजाला प्रा.उप.सह. भंडार भानपुर/ईंटखेड़ी का सुप्रिया महिला प्रा.उ.भंडार में अटैचमेंट)
* 2803054 ➔ 2803056
* 2803088 ➔ 2803087
* 2803090 ➔ 2803092
* 2803095 ➔ 2803096
* 2803104 ➔ 2803069
* 2803014 ➔ 2803016
* 2803036 ➔ 2803035
* 2803032 ➔ 2803129
* 2803184 ➔ 2803233
* 2803216 ➔ 2803187
* 2803226 ➔ 2803067
* 2803174 ➔ 2803167
* 2803158 ➔ 2803011
* 2803159 ➔ 2803194
* 2803152 ➔ 2803153
* 2803146 ➔ 2803259
* 2803183 ➔ 2803200
* 2803230 ➔ 2803086
बैकडोर से दुकान चलाई तो सीधे जेल का रास्ता!
विभाग ने साफ़ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि निलंबित दुकानों के संचालक किसी भी चोर दरवाजे या पिछले रास्ते से राशन बांटते रंगे हाथों पकड़े गए, या फिर जिस नई दुकान में अटैचमेंट किया गया है वहां पुराने संचालकों का कोई परोक्ष प्रभाव, साठगांठ या दखल मिला, तो बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में सीधी प्राथमिकी दर्ज कर कठोरतम कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई होगी।
'सेटिंग' में लगे अमले पर कसता शिकंजा, जांच के आदेश
सूत्रों का दावा है कि जब इन 19 दुकानों पर निलंबन की गाज गिरी थी, तब विभाग के ही कुछ क्षेत्रीय अधिकारी और कर्मचारी मामला दबाने और दुकानों को बहाल कराने की "जुगाड़" में जी-जान से जुटे हुए थे। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों की सख्ती के आगे यह घालमेल नाकाम साबित हुआ। अब इस बात की भी गोपनीय जांच कराई जा रही है कि कहीं निलंबित संचालकों को नई अटैच दुकानों के जरिए पर्दे के पीछे से कोई अनुचित फायदा तो नहीं पहुंचाया जा रहा। अगर जांच में क्षेत्रीय अमले या राशन माफिया की मिलीभगत की पुष्टि हुई, तो कई अफसरों पर सीधी गाज गिरना तय है।
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